दुलारो अयो poem in kudux by namhay billi on tribalzone magazine
Poetry

दुलारो अयो

A poem in Kurux ओ’ल्लगी दुलार अरा चोन्हनती निदीरका अयो , निङहय लोला ए:म मंईंयां निदीरकी र’ई अयो, एमन अइदको दुलार नन्दीन उरमी तिम अयो ! सन्नी नू एमन निङहय कोरा नू लोला नञ्जकीन अयो , चोङखर की निङहय मया ए:म मंईंयां एदकी अयो, ओङहोन-ओङहोन…

Poetry

The Witches of India

I don’t believe in them myself, but perhaps you have heard of them. They say there are witches in India, monsters who want to destroy us all. Tell me, have you seen them yourself? Or are they just made up in cautionary tales? Those in…

कहलाता हैं मर्द a poem by sachin kullu from sambalpur university on tribalzone magazine
Poetry

कहलाता हैं मर्द

अपने को मर्द कहते है ये नामर्द करके बलात्कार, मिटादि अपनी भूख उस पर जो थी लाचार, दिखते हैं ये दरिंदगी किसी की काट के जुबान, पूछो अपने आप से क्या वह नहीं थी भारत माता की संतान? रो रही हैं उसकी माँ पर सोया…

Culture, Poetry, Social

“आंगना और आखड़ा”

आबा केर हाजरी केर दिनएकगो लेमचूस में खुशीमंगर केर बजार सेआयो केर दौरा केरमुढ़ी और लडू में हसीं। ऐसान रहे जीवन गुंडरी और पंडकी लेखे मन,गुल्हेर केर गोली नियार सोच,माटी केर घर आंगन और गांव आखड़ारीझ रंग में धुरधुरा नाच । मोरान हेजान में सोब…

Poetry

The Day The Rooster Slept Late

Fred the red roosterAnd Speckled -Hen RoseWere dancing ‘til midnightOn tip-tapping toes They tangoed and fangoedBeneath the bright moonThey box-stepped and two-steppedWhile Fred hummed a tune It’s time you were sleepingSaid Rose with a yawnFor you must rise earlyTo wake up the dawn Let’s dance…

Poetry, Politics

“हेइज जाए हे मोर गाँव”

ई का होई गेलाक मोर गाँव के?कहाँ चइल गेलाक,कोनो नि बताएकेकोनो चिन्हा नि छोईड़ के।सुनसान छाँवहुर, सुनसान अखड़ासोब दुरा ढपल, अंगना नखे बढ़नाल।बहरे केर चूल्हा में आधा पोड़ाल लुठी,गरु गोहर खाली, छेगरी गुदरी खोलल,मुर्गीगुड़ा तो सुनसान माड़ा।का होलक मोर गाँव के? कबूर केर कच्चा माट्टी…

Poetry, Politics

“मोर आज़ादी केर इतिहास”

तिरंगा आइज खुइलके लहराथे,मोर छाती  एकदम फुलाल,हांथ सलामी ले उठाल,कदम ताल लगिन गोड़ मोर तैयार,का अगस्त, का जनवरीमोंय तो मोर माँट्टी ले सालों साल चढ़ाल । हिंयाँ केर माँट्टी तो मोय हेकों,मोरे लहू से हरा और मेहनत से भरपुर ।मोए आदिवासी, अपन ईज्ज्त के लुटेक…

Poetry

एक संवाद प्रकृति से…

Poem in Hindi by Reshma Ekka यूँ ही एक शाम चलते चलतेनदी के किनारे आकर कदम रुकने गएआज मन ने कहा चलोइन्हीं से कुछ बातें करते हैंजो कुछ ना कह कर भीना जाने कितनी ही बातें करतीं हैंनिरंतर बहती है,,, सोचती हूँ एक बूंद भी अगर…

Poetry

My Adorable Teacher

Teacher, Teacher, my adorable Teacher,You are my guide and preacher;You show the path and show the light,So that my future is bright ! Teacher, Teacher, my adorable Teacher,You are my guide and preacher;You teach lessons and make me strong,Always steady, you are never wrong! Teacher,…

Poetry

कविता

Poem in Hindi by Reshma Ekka मैं तो एक एहसास थीतुमने मुझे जीना सिखा दियाये सच है मैं डरती थी उजालों सेपर तुमने तो मुझे अंधेरों सेलड़ना सिखा दिया,,,, बनना चाहती थी मैं एक चमकता सितारातुमने तो मुझे पूरा चांद बना दियामैं ज़रा् थी तुमने…